शहीदों की याद में जुलूस-ए- अमारी
फतेहपुर/ शहेंशाह आब्दी
फतेहपुर जिला के सदर क्षेत्र के मोहल्ला बाकरगंज से करबला के शहीदों की याद में जुलूस-ए- अमारी और ज़ुल्ज़नाह निकाल कर हज़ारों हुसैनी आज़ादार मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन को याद कर के मातम करते हुवे पुरसा देते रहे और लब्बैक या हुसैन की सदाएं बुलंद करते रहे सुबह से ले कर शाम तक बाकरगंज से अलीगंज तक यजीद मुर्दाबाद के नारा लगाते रहे इस मौके पर साहेब बयाज़ ज़ैन फतेहपुरी, एवं उत्तर अली, और लखनऊ के मशहूर नौंहाख़ान अली मूसा ने कलाम पेश किए साथ ही ज़िला सुल्तानपुर मनियारपुर की अंजुमन हैदरिया ने भी अपने बेहतरीन कलाम पेश किए ये वो हुसैन हैं जो मोहम्मद साहब के नवासे हैं हज़रत अली के बेटे हैं इमाम हुसैन को कूफ़े से हज़ारों ख़त भेज कर करबला बुलाया गया और लिखा गया की आप हमारी मदद के लिए आइए इस्लाम ख़तरे में है लेकिन हुसैन के आने के बाद कूफ़े के लोग यजीद के डर से हुसैन का साथ छोड़ दिया हुसैन मदद के लिए बुलाते रहे लेकिन कोई भी मदद के लिए नहीं आया फिर भी हुसैन अपने बहत्तर वफ़ादार साथियों के साथ यजीद के अत्याचारों का डट कर मुकाबला करते रहे और अंत में तीन दिनों की भूख और प्यास के बाद भी ऐसी जंग करी जो दुनिया के लिए मिसाल बन गई यजीद की लाखों वाली फ़ौज हुसैन के बहत्तर साथियों से ऐसी पराजित हुई कि आज पूरी दुनिया में हुसैन ज़िंदाबाद के नारे लग रहे हैं आखिर हुसैन ने मज़ हबे इस्लाम के लिए अपने को कुर्बान कर दिया. हुसैन की सहादत और क़र्बला की मिट्टी से आज भी शहीदो की खून की खुशबु आलमे दीन महसूस कर रहा और अत्याचारी यजीद को हर इंसान मुर्दाबाद के नारों से संबोधित करता है इस मौके पर साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी राष्ट्रीय महासचिव शीबू ख़ान. उत्तराखंड प्रभारी वरिष्ठ पत्रकार पारुल सिंह, के साथ मीडिया टीम जुलूस समापन तक मौजूद रही
