जुलूसे मोहम्मदी मे नातो की हुईं बारिश
,बरावफात को मिलाद-उन-नबी भी कहते हैं. ये दिन पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद की यौमे पैदाइश (जन्मदिन) के तौर पर मनाया जाता है. बारावफात इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल में मनाया जाता है.
जहाँ पूरी दुनिया मे पैगम्बर मोहम्मद साहेब के जन्मदिन की खुशियाँ मनाई जा रही हैँ तो दूसरी तरफ जनपद फतेहपुर मे भी मुस्लिम समुदाय के लोगो की अपने पैगम्बर के जन्मोत्सव को लेकर जागरूकता देखने को मिली जगह जगह शहर से लेकर गाँव तक सजावट और कुरान की तिलावत, तक़रीर, नातिया मुशायरा और पूरी रात अपने आका पर दरूद सलाम भेजना सिलसिला जारी रहता हैँ, हज़रत मोहम्मद साहेब की पैदाइस का जश्न मनाने वालों का लश्कर जलूसे मोहम्मदी के शक्ल मे देखने को मिलता हैँ, हर क्षेत्र के मोहल्ले निवासी अपने अपने जलूस मोहम्मदी को लेकर एक स्थान पर एकत्र होते हैँ, धर्म गुरु की अगुवाई मे काफीले के रूप मे शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुये देर रात अपने अपने स्थान के लिए कूच कर जाते, भ्रमण करते समय नातो का सिलसिला जारी रहता हैँ एक से बढ़कर एक नात शरीफ पढ़ कर अपने आका हज़रत मोहम्मद साहेब की यौमे पेदाईस पर नज़राने के तौर पर नज़राना अक़ीदत पेश करते हैँ
