- फतेहपुर दोआबा टूडे कार्यालय में गणेश शंकर विद्यार्थी जयंती पर दी गई पुष्पांजलि
रवि विश्वकर्मा
फतेहपुर – जिले में सोमवार को गणेश शंकर विद्यार्थी चित्र में फूलों की माला डाल कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया । और श्री विधार्थी जी बताएं हुए मार्गदर्शन में चलने की कलम कारों को जानकारी दी गई। दो -आबा टूडे के प्रधान संपादक मुमताज अहमद ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी अपने जीवन में पत्रकारिता क्षेत्र में विशेष रूप से योगदान दिया। जिससे चौथे स्तम्भ के रूप में पत्रकार के लिए समाज दबे कुचले, सामाजिक ढांचा, राजनीतिक ढाचां सही दिशा में लिखने के लिए प्रेरित किया जाता है। ईष्या और भेदभाव से हटकर कलम कारों को अपने लिखने पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। तभी समाज में कलम कारों की अपनी अलग छाप दिखाई पडेगी। हमेशा विद्यार्थी जी ईमानदारी से हर क्षेत्र में डटे रहे।
इंसेट- गणेश शंकर विधार्थी जी का जन्म और प्रारंभिक जीवन
• जन्म: 26 अक्टूबर 1890 को ननिहाल इलाहाबाद (प्रयाग) में हुआ था।
• मूल निवास: इनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के हथगाँव (अता) क्षेत्र का था।
• माता-पिता: पिता मुंशी जय नारायण (जो ग्वालियर रियासत/मध्य प्रदेश के मुंगावली में शिक्षक थे) और माता गोमती देवी थीं।
• विवाह: 4 जून 1909 को चंद्रप्रकाशवती के साथ विवाह हुआ।
• शिक्षा एवं शौक: पिता के साथ रहने के दौरान ही उन्होंने हिंदी और उर्दू की शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही इन्हें पढ़ने का बहुत शौक था, जिससे मित्र इन्हें ‘विद्यार्थी’ कहने लगे और आगे चलकर यही उनका उपनाम बन गया।
पत्रकारिता और साहित्यिक योगदान
• ‘प्रताप’ का प्रकाशन: 9 नवंबर 1913 को कानपुर से हिंदी का साप्ताहिक (बाद में दैनिक) समाचार पत्र ‘प्रताप’ शुरू किया। यह पत्र किसानों, मजदूरों और दबे-कुचले लोगों की आवाज बना।
• अन्य पत्रिकाएं: इन्होंने ‘प्रभा’ नामक मासिक पत्रिका भी निकाली और ‘सरस्वती’ पत्रिका में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सहायक के रूप में कार्य किया।
• क्रांतिकारियों से जुड़ाव: ‘प्रताप’ अखबार क्रांतिकारियों की शरणस्थली और उनकी आवाज़ बना। इन्होंने सरदार भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों का खुलकर समर्थन और सहयोग किया।
• प्रमुख रचनाएँ: “शेखचिल्ली की कहानियाँ”, “हमारी आत्मोसर्गता” (16 वर्ष की आयु में लिखी), तथा विक्टर ह्यूगो के प्रसिद्ध उपन्यास ‘निन्यानवे’ (Ninety-Three) का हिंदी अनुवाद किया।
स्वतंत्रता आंदोलन और राजनीतिक सफर
• राजनीतिक गुरु: पहले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को अपना राजनीतिक गुरु माना, बाद में महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उनके अनن्य भक्त बने।
• आंदोलनों में सहभागिता: असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 1930 में इन्हें उत्तर प्रदेश प्रांतीय कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष भी चुना गया।
• जेल यात्राएं: ब्रिटिश शासन के अन्याय और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लिखने के कारण इन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।
इस मौके पर उप संपादक पारूल सिंह, अजमी, पकंज कुमार, दिनेश कुमार, सहित अन्य पत्रकार बंधु मौजूद रहे।
