🌹इमाम हुसैन की शहादत का मुकम्मल वाकिया 🌹
👉..,,पेशकर्ता,,, अख्तर नक्शबंदी मुज्जदिदी
👉..हवाला,,, खुतबाते मुहर्रम,, 471-478 तक
👉,,,, ताज़दारे करबला, जिगर पारा ए रसूल, अली के लाल, हजरते फातिमा के दिल के चैन हज़रत इमाम हुसैन रदी अल्लाहु तआला अन्हुं ने जब मैदाने जंग में जाने का इरादा फ़रमाया तो हज़रत जैनुल आबेदीन अपनी बीमारी की कमज़ोरी के बावजूद नेज़ा लिए इमाम हुसैन की खिदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया बाबा जान। पहले हमें मैदान ए जंग में जाने और अपनी जान निसार करने की इजाज़त दीजिए। मेरे होते हुए आप शहीद हो जाए यह नहीं हो सकता, इमामे हुसैन ने अपने नूर ए नज़र को अपनी आगोश ए मुहब्बत में लिया, प्यार किया और फ़रमाया बेटा! मैं तुम्हें कैसे इजाज़त दे दूं? अली अकबर, अली असगर, कासिम, अब्बास और तमाम अज़ीज़ शहीद हो गए मैं तुम्हें इजाज़त दे दूं तो ख्वातीन ए अहले बैत का कौन महरम रह जायेगा, इन बेकस गरीबुल वतन को मदीना कौन पहुंचाएगा? मेरे प्यारे बेटे तुम्हें जिंदा रहना है, तुम्हें शहीद नही होना है, वरना मेरी नस्ल किस से चलेगी? हुसैनी सादात का सिल सिला किस से जारी होगा? मेरी सारी उम्मीदें तुम्हारी ज़ात से वाबस्ता है, देखो मेरी तरह सब्रो इस्तिकामत से रहना, राह ए हक़ में आने वाली हर तकलीफ़ व मुसीबत को बर्दाश्त करना और हर हाल में अपने नाना जान हुज़ूर अलैहिस्लाम की शरीअत व उनकी सुन्नत की पैरवी करना।
फिर इमाम हुसैन ने उनको तमाम जिम्मेदारीयों का हामिल किया अपनी दस्तार ए मुबारक उतार कर उनके सर पर रख दी और उन्हें बिस्तरे अलालत पर लिटा दिया। अब इमामे पाक अपने खेमे में तशरीफ़ लाए, संदूक खोला, कुबाए मिश्री ज़ेबे तन फरमाई और तबर्रुकात में से अपने नाना जान का अमामा शरीफ़ सर पर बांधा, हज़रत अमीर ए हम्ज़ा की ढाल पुश्त पर रखी, हज़रत अली की तलवार जुल्फिकार गले में लटकाई और जाफरे तैय्यार का नेजा़ हाथ में लिया और जंग में जाने को तैय्यार हो गए, बीवियों ने जब इस मंज़र को देखा तो उन के चेहरों के रंग उड़ गए और आंखों से मोती टपकने लगे हजरते जैनब ने आंसू बहाते हुए कहा प्यारे भैया, बीवियों ने दर्द में डूबी हुईं आवाज़ से कहा हमारे सरताज़, और हजरते सकीना ने रोते हुए कहा बाबा जान! कहा जा रहे हो? इस जंगल में हमें किस के सुपुर्द करके जा रहे हो? जो दरिंदे नन्हें अली असगर पर रहम नहीं खाए वह हमारे साथ क्या सुलूक करेंगे, इमाम ने फरमाया अल्लाह करीम तुम लोगों का हाफ़िज़ व निगेहबान है। फिर आपने अहले ख़ेमे को सब्र व शुक्र की वसीयत फरमाई और सबको अपना आख़री दीदार दिखा कर घोड़े पर सवार हो गए।
गरीबुल वतन और बेकस मुसाफिरो का काफिला हसरत भरी निगाहों से आपको देखता रहा और सबकी आंखों से अश्के गम के मोती टपकते रहें, मगर कोई चीज़ इमाम के पांव की बेड़ियां न बन सकी, आप ने सब को खुदा के हवाले किया और दुश्मनों के सामने पहुंच गए कई दिन के भूखे प्यासे है और बेटों, भाईयो, भतीजों और जां निसार साथियों की शहादत ए गम से निढाल है इस के बावजूद पहाड़ों की तरह जमी हुईं फोज़ो के मुकाबले में शेर की तरह डट कर खड़े हो गए और आपने एक फसीह व बलीग तकरीर की, उस में आपने हम्द-ओ-सलात के बाद फरमाया ए लोगों! तुम जिस रसूल का कलमा पढ़ते हो उसी रसूल का इरशाद है की जिसने हसन और हुसैन से दुश्मनी रखी उसने मुझसे दुश्मनी रखी और जिस ने मुझसे दुश्मनी रखी उसने अल्लाह तआला से दुश्मनी रखी। तो ए यजीदियो अल्लाह तआला से डरो, और मेरी दुश्मनी से बाज़ आओ अगर वाकई अल्लाह करीम पर ईमान रखते हो तो सोचो अल्लाह तआला को क्या मुंह दिखाओगे? बे-वफा लोगों तुमने मुझे खत भेज कर यहां बुलाया और जब में यहाँ आया तो तुमने ऐसा बुरा सुलूक किया कि ज़ुल्म की इंतिहा कर दी। जालिमों तुमने मेरे बेटों, भाईयों, भतीजों को ख़ाक ओ खून में तड़पाया चलने जहरा के एक-एक फूल को काट डाला, मेरे तमाम साथियों को शहीद कर दिया और अब मेरे खून के प्यासे हो, अपने रसूल का घर वीरान करने वालों, अगर कियामत पर ईमान रखते हो तो अपने अंज़ाम पर गौर करो। फिर यह भी सोचो कि मैं कौन हूं, किस का नवासा हुं, मेरे वालिद कौन है, मेरी वालिदा किस की लख्त ए जिगर है? मैं उसी फातिमा जहरा का फरजंद हूं कि जिन के पुलसिरात पर गुजरते वक्त अर्श से निदा की जाएगी कि ए अहले महशर! अपने सरो को झुका लो, खातून ए जन्नत सत्तर हज़ार हूरो के साथ गुज़रने वाली है। बे गैरतो! अब भी वक्त है शर्म से काम लो और मेरे खून से अपने हाथो को रंगीन मत करो।
हज़रत इमाम की तकरीर सुन कर यजीदी फ़ौज के बहुत से लोग मुतासिर हो गए और उनकी आंखों से आंसू ज़ारी हो गए लेकिन शिमर वगैरह बदबख्त खबीसो को कोई असर न हुवा। बल्कि जब उसने अपने लश्कर के बहुत से लोगो पर इमाम हुसैन की तकरीर का असर देखा तो शोरो-गुल मचाना शुरू कर दिया कि आप या तो यजीद की बैत करलें या जंग के लिए तैयार हो जाए इसके अलावा हम कुछ सुनना नहीं चाहते। इमाम ने फरमाया ए बद बातिनो! मुझे खूब मालूम है की तुम्हारे दिलों पर शकावत और बद बख्ती की मुहर लग चुकी है और तुम्हारी गैरत ए ईमानी मुर्दा हो चुकी है लेकिन मैंने ये तकरीर सिर्फ इत्मीनान ए हुज्जत के लिए की ताकि तुम यह न कह सकों की हमने हक़ और इमाम ए बरहक को नहीं पहचाना था। अलहम्दुलिल्लाह मैंने तुम्हारा यह उजर (बहाना) खत्म कर दिया अब रहा यजीद की बैत का सुवाल? तो यह मुझसे हरगिज़ नहीं हो सकता कि मैं बातिल के सामने सर झुका दूं
_मर्द ए हक़ बातिल के सामने हरगिज़ खौफ खा सकता नहीं.,_
_सर कटा सकता है लेकिन सर झुका सकता नहीं.!_
इमामे आली मकाम ने फरमाया अब तुम लोग जो इरादा रखते हो पूरा करो और जिसे मेरे मुकाबले में भेजना चाहते हो भेजो बड़े-बड़े मशहूर बहादुर जी शेर ए खुदा के शेर से मुकाबले के लिए महफूज़ रखे गए थे उनमें से इब्ने सअद ने सबसे पहले तमीम बिन कहतबा को आपसे जंग करने के लिए भेजा, जो मुल्क ए शाम का नामी गिरामी पहलवान था, वह गुरुर और घमंड से हाथी की तरह झूमता हुआ और अपनी बहादुरी की डींगे मरता हुवा इमाम के सामने आया और पहुंचते ही आप पर हमला करना चाहा अभी उसका हाथ उठा ही था की अली के शेर ने जुल्फीकारे हैदरी से ऐसा वार किया कि उसका सर जिस्म से उड़ा दिया और उसके घमंड को ख़ाक में मिला दिया।
फिर यजीद अबतही बड़े कर्रो-फर के साथ आगे बढ़ा और चाहा की इमाम के सामने अपना जोहर दिखा कर यजीदी फ़ौज में शाबाशी हासिल करू आपके सामने पहुंच कर एक नारा मारा और कहा कि शाम व इराक के बहादुराने कोह शिकन में मेरी बहादुरी का गलगला है मैं रूम व मिस्र में शोहरए आफाक हूं बड़े-बड़े बहादुरो को आंख झपकते मौत के घाट उतारता हूं, सारी दुनियां के लोग मेरी बहादुरी का लोहा मानते है और मेरे सामने भेड़-बकरी की तरह भागते है आज तुम मेरी कुव्वत और मेरे दांव पेंच को देखो। इमाम हुसैन ने ये सब सुनने के बाद फरमाया तू मुझे जानता नहीं मैं अपनी रगो में हाशिमी खून रखता हूं, फातिहे ख़ैबर, शेरे खुदा का शेरे नर हूं, तुम जैसे ना मर्दों की मेरी निगाह में कोई हकीकत नहीं, मेरी नज़र में मक्खी और मच्छर से ज्यादा तेरी हैसियत नहीं, शामी जवान यह सुनकर आग बबूला हो गया और फौरन घोड़ा कूदा कर आप पर वार कर दिया, हज़रत इमाम ने उसके वार को बेकार कर दिया और फिर झपट कर उसकी कमर पर ऐसी तलवार मारी कि वह गाज़र की तरह कट कर दो टुकड़े हो गया और मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ा।
बदर बिन सुहैल यमनी इस मंज़र को देख कर गुस्से से लाल-पीला हो गया और इब्ने सअद से कहा तुमने किन गवारो को हुसैन के मुकाबले में भेज दिया जो दो हाथ भी जम कर मुकाबला नहीं कर सके, मेरे चारो बेटो में से किसी एक को भेज दें फिर देख अभी मिनटों में हुसैन का सर काट कर लाते है, इब्ने सअद ने उसके बड़े बेटे को इशारा किया वह घोटा कुदाता इमाम के सामने पहुंच गया, आपने फरमाया बेहतर होता की तेरा बाप मुकाबले में आता ताकि वह तुझे ख़ाको खून में तड़पता हुवा न देखता। फिर आपने जुल्फिकारे हैदरी से एक ही वार में उसका काम तमाम करके जहन्नम में पहुंचा दिया।
बदर ने जब अपने बेटे को इस तरह जिल्लत के साथ कत्ल होता देखा गुस्से में घोड़ा दौड़ा कर इमाम के सामने आया और पहुंचते ही नेज़े से वार किया, आपने उसके नेजे को कलम कर दिया उसने फौरन तलवार संभाली और कहा हुसैन! देखना मैं वो शमशीर मरता हूं कि अगर पहाड़ पर मारू तो वह सुर्मा बन जाए, यह कहते हुए इमाम पर तलवार चला दी आपने उसके वार को खाली कर दिया और उस पर जुल्फिकार का ऐसा भरपूर हाथ मारा कि बदर का सर कट कर गेंद की तरह दूर जाकर गिरा।
इस तरह शाम और इराक के एक से एक मशहूर बहादुर इमाम के सामने आते रहे मगर जो भी सामने आया आपने उसे मौत की घाट उतार दिया, शेरे खुदा के शेर ने तीन दिन से भूखा प्यासा होने के बावजूद शुजाअत व बहादुरी के जौहर दिखा दिए इमाम हुसैन ने दुश्मनों की लाशों का अंबार लगा दिया। बहादुराने शाम और इराक के खुनो से करबला के प्यासे रेगिस्तान को सैराब कर दिया।
फिर दुश्मनों के लश्कर में शोर बरपा हो गया की जंग का यह अंदाज रहा तो हमारी फ़ौज का एक सिपाही जिंदा बच कर नही जा सकेगा, सबकी औरते बेवा हो जायेगी और सारे बच्चे यतीम हो जायेंगे लिहाज़ा अब मौका मत दो और हुसैन इब्ने अली को चारो तरफ से घेर कर हमला कर दो। यजीदी फ़ौज के हजारों सिपाहियो ने इमामे हुसैन पर चारों तरफ से हमला कर दिया।
_वो गुल एज़ारे फातिमा खारों में घिर गया.,_
_तन्हा अली का लाल हज़ारों में घिर गया.!❤🩹_
अब सैकड़ों तलवारे एक साथ चलने लगी, पचासों नेजेे आपस में टकराने लगे और दुश्मन बढ़ कर इमाम पर वार करने लगें। इधर आप की तलवार जलाले हैदरी की तस्वीर और ला सैफ़ इल्ला जुल्फिकार की तफ्सीर बनी हुई थी आप जुल्फिकार के जौहर दिखा रहे थे जिस तरफ हमला करते दुश्मनों के सरो को तन से जुदा कर देते।
इब्ने सअद को अब इस तरह की जंग में भी कामयाबी नज़र नही आ रही थी तो उसने हुक्म दिया की चारो तरफ से तीरों की बरसात कर दी जाए और जब खूब ज़ख्मी हो जाए तब नेजे से हमला किया जाए, तीर अंदाजो ने आपकी चारो तरफ से घेर लिया और एक ही वक्त में हज़ारों तीर कमानो से छूटने लगे आप का घोड़ा इस तरह ज़ख्मी हो गया की उसमे काम करने की ताकत न रही, मजबूरन इमाम हुसैन को एक जगह ठहरना पढ़ा हर तरफ से तीर आ रहे है और इमाम हुसैन का जिस्म तीरों का निशाना बना हुवा है जिस्म मुक्कदस ज़ख्मों से चूर और लहू लुहान हो रहा है बेवफा कुफियों ने जिगर पारा ए रसूल, फरजंदे बतूल को मेहमान बुला कर उनके साथ यह सुलूक किया, यहां तक की ज़हर में बुझा हूवा एक तीर आपकी उस मुबारक पेशानी पर लगा जिसे हुजूर अलैहिस्लाम हज़ारों बार चूमा था। तीर लगते ही चेहरे अनवर पर खून का धारा बह निकला, आप गश खा कर घोड़े की जीन से फर्श ए जमीन पर आ गए, अब जालिमों ने नेज़ो से हमला किया शैतान सिफत सनान ने ऐसा नेजा मारा जो तने अक्दस के पार हो गया, तीर और नेजे के 72 ज़ख़्म खाने के बाद आप सजदे में गिरे और अल्लाह तआला का शुक्र अदा करते हुवे वासिले बहक़ हो गए।
56 साल, 5 माह, 5 दिन की उम्र में जुमुआ के दिन मुहर्रम की दसवीं तारीख 61 हिज़री मुताबिक 680 ई० को इमामे आली मकाम ने इस दार ए फानी से रिहलत फरमाई।
“_इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलयही राज़िऊन_”
ज़ालिम यजीदियों ने समझा की हमने इमामे हुसैन को मार डाला और वो हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गए लेकिन करबला का जर्रा-जर्रा जबाने हाल से हमेशा कहता रहेगा की ए इमामे हुसैन!
_तू जिंदा है वल्लाह, तू जिंदा है वल्लाह.,_
_मेरी चश्म ए आलम से छिप जाने वालें.!_
_कत्ल ए हुसैन अस्ल में मरगे यजीद है.,_
_इस्लाम जिंदा होता है हर करबला के बाद.!_
