*ठण्ड एवं शीतलहरी से बचाव*
*क्या करें*
✓जलावन हेतु लकड़ी/पुआल / कण्डा/ हीटर आदि की पूर्व में ही व्यवस्था कर लें।
✓घर में पर्याप्त राशन का भण्डारण सुनिश्चित कर लें।
✓पशुओं के लिए चारा एवं अलाव जलाने हेतु पुआल / कण्डा/ लकड़ी आदि का प्रबन्ध कर लें।
✓अपने घर पर फस्ट एड् किट तैयार रखें और उसमें सामान्य रोग के लिए दवा की व्यवस्था कर लें।
✓घर में विशेष रोगी के लिए आवश्यक दवाए पहले से ही खरीद कर रख लें, जिससे मौसम खराब होने की स्थिति में मरीज को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
✓अपने नजदीकी डाक्टर, चार पहिया गाड़ी मालिक, मेडिकल स्टोर के मालिक तथा एम्बुलेंस आदि का सम्पर्क नम्बर अवश्य रखें।
✓रेडियों, टी०वी० एवं स्थानीय समाचार पत्रों से मौसम की अद्यतन जानकारी प्राप्त करते रहें।
✓कड़ाके की ठण्ड में घर के अंदर रहे और कोशिश करें कि एकदम सुबह और एकदम शांम को यात्रा न करना पड़े।
✓गर्म एवं मोटे तथा शरीर को पूरा ढ़कने वाले कपडे ही पहने।
✓बच्चो को अच्छी तरह गर्म कपड़ो से ढक कर रखें। खासतौर पर ध्यान रखें, कि बच्चों का सिर, कान, छाती तथा पैर अच्छी तरह गर्म कपड़ों से ढका हो।
✓पीने के लिए पानी या स्नान हेतु गुनगुने पानी का उपयोग करें। अगर यह संभव नहीं हो पा रहा है तो इस हेतु नल/ हैण्डपम्प का ताजा पानी उपयोग करें।
✓हमेशा ताजा एवं गर्म भोजन करें। समय-समय पर गर्म पेय पदार्थ पीते रहें।
✓यात्रा के दौरान गाडी धीरे चलायें एवं सिर को हेलमेट तथा पैर को मोजे एवं जूते से सुरक्षित रखे।
✓अधिक कोहरे में यदि गाड़ी चला रहे हैं तो इंडिकेटर का प्रयोग अवश्य करें और गाड़ी की गति धीमी रखे।
✓अलाव जलाकर आग के सामने बैठे।
✓नहाने के बाद सिर एवं पूरे शरीर को सूखे कपड़े से ठीक से पोछ लें।
✓पशुओं को भरपूर चारा खिलायें, ताजा नल से निकाला हुआ पानी पिलाये एवं पशु बॉडे में धुईहर/धुआं सुलगाने की व्यवस्था करें।
✓अगर आप यात्रा में हैं तो रैन बसेरा में शरण लेकर अपने आप को सुरक्षित करें।
✓यदि आप शहरी क्षेत्र या कस्बा में निवास कर रहें हैं और आप का घर ठण्ड के कारण बहुत सुरक्षित नहीं है तो तुरन्त रैन बसेरा में शरण लें और अपने आपको एवं अपने परिवार को सुरिक्षत करें।
✓शीतदंश / हाइपोथरमिया बीमारी के संकेतों पर जरूर ध्यान दें, जैसे- अगर आपके अंदर महसूस करने की क्षमता में कमी होती महसूस हो रहा है, हाथों / पैरों या कान के नीचे सफेद या पीला धब्बा दिख रहा हो आदि।
*क्या न करें:-*
✓ज्वलनशील पदार्थ जैसे-पेट्रोल, डीजल, मिटटी के तेल आदि के पास जलती हुई अंगीठी को न रखें।
✓विस्तर के आस पास आग जलाकर न सोयें।
✓सोने के समय कोयला की अंगेठी में जिंदा आग जलाकर न सोये उसे अवश्य बूझा दें। आप जब तक अंगीठी जल रही है तब तक कमरे की खिड़की खुली रखें और अंगेठी का धुंआ खिड़की से निकलते रहने दें।
✓बच्चों को पानी मे न भीगने दें।
✓बासी एवं ठण्डे भोजन का उपयोग न करें।
✓भण्डारित जल के ठण्डे पानी से स्नान करने से बचें।
